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PM मोदी का बड़ा फैसला: साउथ अफ्रीका में 7वीं पीढ़ी तक OCI सुविधा

SHIDDHANT
21 Nov 2025 10:06 PM IST
PM मोदी का बड़ा फैसला: साउथ अफ्रीका में 7वीं पीढ़ी तक OCI सुविधा
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भारत–दक्षिण अफ्रीका संबंधों में नई मजबूती
Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि अब दक्षिण अफ्रीका में 7वीं पीढ़ी तक के भारतीय मूल के लोगों को OCI (Overseas Citizenship of India) सुविधा उपलब्ध होगी। पहले यह सुविधा केवल 4th जनरेशन तक ही सीमित थी। पीएम मोदी ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह निर्णय भारत और दक्षिण अफ्रीका के भारतीय समुदाय के बीच गहरे रिश्तों को और मजबूती देगा।
प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में लिखा,
"दक्षिण अफ्रीका में भारतीय प्रवासी सरकार के OCI सुविधा को 7वीं पीढ़ी तक बढ़ाने के फैसले से बहुत खुश हैं। पहले यह केवल चौथी पीढ़ी तक उपलब्ध थी। यह निर्णय दक्षिण अफ्रीका के उत्साही भारतीय समुदाय के साथ हमारे संबंधों को और मजबूत करता है। इस घोषणा के बाद साउथ अफ्रीका में बसे भारतीय मूल के प्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। वहां की भारतीय कम्युनिटी लंबे समय से इस मांग को उठा रही थी, ताकि उनके बच्चों—पोते, परपोते—सभी को भारत से जुड़ा महसूस कराने वाली आधिकारिक और कानूनी पहचान बनी रहे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों का इतिहास 1860 के दशक से जुड़ा है, जब वहां पहली बार भारतीय मजदूर भेजे गए थे। आज अनुमानित 15–20 लाख भारतीय मूल के लोग वहां रहते हैं। कई परिवार 5वीं, 6ठी और 7वीं पीढ़ी में पहुंच चुके हैं।
पहले चौथी पीढ़ी के बाद जन्म लेने वाले लोगों को OCI का लाभ नहीं मिलता था, जिससे कई परिजन OCI स्टेटस से बाहर रह जाते थे। नई सुविधा से सभी पीढ़ियां भारत से जुड़े आधिकारिक रिश्ते को बनाए रख सकेंगी। इससे सांस्कृतिक, पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत होगा।
OCI सुविधा मिलने से क्या लाभ?
बार-बार वीज़ा की जरूरत नहीं
भारत में अनिश्चितकाल तक रहने, पढ़ने और व्यापार करने की सहूलियत
संपत्ति खरीदने और व्यवसाय करने में आसानी
भारत के साथ सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध मजबूत
भारत–दक्षिण अफ्रीका संबंधों में नई मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम को भारत–दक्षिण अफ्रीका के कूटनीतिक और सांस्कृतिक रिश्तों में एक बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल लंबे समय से चली आ रही प्रवासी भारतीयों की मांग को पूरा करता है, बल्कि दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के जुड़ाव को भी नई दिशा देता है।
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